उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is samundar mein sanbhal kar hi utarna warna

इस समुंदर में सँभल कर ही उतरना वर्ना

اس سمندر میں سنبھل کر ہی اترنا ورنہ

शायर: Sabir Aafaque7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस समुंदर में सँभल कर ही उतरना वर्ना
इश्क़ पर सब ही कहेंगे तुझे वर्ना वर्ना

देखने की तो इजाज़त है मगर ध्यान रहे
उस की आँखों में किसी ने न सँवरना वर्ना

क़ुव्वत-ए-सिक़्ल है जो अपनी तरफ़ खींचती है
कब बुलंदी से उतरता भला झरना वर्ना

सिर्फ़ काजल की लकीरें ही भली लगती हैं
उस की आँखों में कोई रंग न भरना वर्ना

है इजाज़त कि सभी ज़ख़्म भरो मरहम से
हाँ मगर ध्यान कि इक ज़ख़्म न भरना वर्ना

हिज्र में ज़ब्त करो जितना हो मुमकिन या फिर
टूटना ऐसे कि हर सम्त बिखरना वर्ना

इश्क़ इक आग का दरिया तो है सच है लेकिन
कोई दिक़्क़त हो तो फिर पुल से गुज़रना वर्ना