उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab ki nazron mein yun bhi pyara hun

सब की नज़रों में यूँ भी प्यारा हूँ

سب کی نظروں میں یوں بھی پیارا ہوں

शायर: Faisal Qadri Gunnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब की नज़रों में यूँ भी प्यारा हूँ
मैं तिरी इक नज़र का मारा हूँ

वक़्त के साथ मुझ को बहना है
मैं तो पानी का एक धारा हूँ

तुम ने जब अपना कह दिया है मुझे
कैसे कह दूँ कि बे-सहारा हूँ

'इश्क़ में क्या यही नहीं काफ़ी
मेरे तुम और मैं तुम्हारा हूँ

चाहता मैं तो जीत सकता था
तेरी ख़ातिर ये बाज़ी हारा हूँ

यूँ खटकता हूँ सब की आँखों में
तेरी आँखों का मैं जो तारा हूँ

तुझ से 'फ़ैसल' है बाहमी रिश्ता
तू है कश्ती तो मैं किनारा हूँ