उर्दू शायरी · ग़ज़ल

saz-e-alam pe dil naghma-sara hota hai

साज़-ए-आलाम पे दिल नग़्मा-सरा होता है

ساز آلام پہ دل نغمہ سرا ہوتا ہے

शायर: Parkash Nath Parvez7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साज़-ए-आलाम पे दिल नग़्मा-सरा होता है
ऐ मोहब्बत ये तिरे दौर में क्या होता है

फैल जाती है फ़ज़ाओं में उदासी की घटा
इश्क़ जब हुस्न से रो रो के जुदा होता है

हौसला दीद का हरगिज़ न करें अहल-ए-नज़र
जल्वा-ए-हुस्न बहुत होश-रुबा होता है

वो हवस है जो गिला करती है रंज-ओ-ग़म का
इश्क़ हर हाल में राज़ी-ब-रज़ा होता है

उन के मुबहम से इशारों का तअस्सुर तौबा
दिल में क्या मा'रका-ए-यास-ओ-रजा होता है

हम जो कहते हैं उसे वक़्त का शहकार-ए-जमील
बात कुछ भी नहीं लेकिन वो ख़फ़ा होता है

रविश-ए-ख़ास पे चलता हूँ अदब में 'परवेज़'
मेरे हर शेर का अंदाज़ नया होता है