उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sath lagta hai sang lagta hai

साथ लगता है संग लगता है

ساتھ لگتا ہے سنگ لگتا ہے

शायर: Aamir Ata6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साथ लगता है संग लगता है
दिल सदा महव-ए-जंग लगता है

रोना पड़ता है इस लिए मुझ को
मेरी आँखों को ज़ंग लगता है

क़ैस ने कर लिया गुज़ारा मगर
मुझ को ये सहरा तंग लगता है

रोज़ हम ख़ुद से हार जाते हैं
रोज़ मैदान-ए-जंग लगता है

मेरी आँखों को तो ये क़ौस-ए-क़ुज़ह
तेरी चुनरी का रंग लगता है

ये नशा है तुम्हारी आँखों का
फिर भी लोगों को भंग लगता है