उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samne ho to bas ishaara kar

सामने हो तो बस इशारा कर

سامنے ہو تو بس اشارہ کر

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सामने हो तो बस इशारा कर
वो चला जाए तो पुकारा कर

आया क्यों था पराई महफ़िल में
अपनी तन्हाई से गुज़ारा कर

उस ने दिल से नहीं किया है मु'आफ़
आख़िरी जुर्म है दुबारा कर

तुझ को दरबार में भी रहना है
'शाह' की शा'इरी गवारा कर

कब तलक दूसरों से लिपटेगा
अपनी जानिब भी इक इशारा कर

तू पिला देता है हमें जो शराब
तू ही उस का नशा उतारा कर

बरती हैं मेहरबानियाँ जिस की
उस की मजबूरी भी गवारा कर