उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samne aankhon ke ghar ka ghar bane aur TuT jae

सामने आँखों के घर का घर बने और टूट जाए

سامنے آنکھوں کے گھر کا گھر بنے اور ٹوٹ جائے

शायर: Ganesh Bihari Tarz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सामने आँखों के घर का घर बने और टूट जाए
क्या करे वो जिस का दिल पत्थर बने और टूट जाए

हाए रे उन के फ़रेब-ए-वादा-ए-फ़र्दा का जाल
देखते ही देखते इक दर बने और टूट जाए

हादसों की ठोकरों से चूर होना है तो फिर
क्यूँ न ख़ामोशी से दिल साग़र बने और टूट जाए

हम भी ले लें लुत्फ़-ए-तीर-ए-नीम-कश गर वो नज़र
आते आते क़ल्ब तक ख़ंजर बने और टूट जाए

उन के दामन की हवा भी किस को होती है नसीब
आज हर आँसू मिरा गौहर बने और टूट जाए

यूँ बिखरता ही रहा ऐ 'तर्ज़' हर सपना मिरा
सुब्ह जैसे ख़्वाब का मंज़र बने और टूट जाए