उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dosti apni jagah aur dushmani apni jagah

दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह

دوستی اپنی جگہ اور دشمنی اپنی جگہ

शायर: Ganesh Bihari Tarz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह
फ़र्ज़ के अंजाम देने की ख़ुशी अपनी जगह

हम तो सरगर्म-ए-सफ़र हैं और रहेंगे उम्र भर
मंज़िलें अपनी जगह आवारगी अपनी जगह

पत्थरों के देस में शीशे का है अपना वक़ार
देवता अपनी जगह और आदमी अपनी जगह

ज्ञान माना है बड़ा भक्ती भी लेकिन कम नहीं
आगही अपनी जगह दीवानगी अपनी जगह

सुब्ह हैं सज्दे में हम तो शाम साक़ी के हुज़ूर
बंदगी अपनी जगह और मय-कशी अपनी जगह

सारा आलम है तरन्नुम-ख़ेज़ ऐ शाइर-नवाज़
शेर की अपनी जगह और 'तर्ज़' की अपनी जगह