उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ruh ko meri tawajjoh chahiye

रूह को मेरी तवज्जोह चाहिए

روح کو میری توجہ چاہیے

शायर: Ikram Basra8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रूह को मेरी तवज्जोह चाहिए
ज़ख़्म से गहरी तवज्जोह चाहिए

घर की हालत देख कर लगता नहीं
अब इसे कोई तवज्जोह चाहिए

जम गई है काई सी दहलीज़ पर
तेरे क़दमों की तवज्जोह चाहिए

पहले मुझ को चाहिए था तू मगर
अब फ़क़त तेरी तवज्जोह चाहिए

एक चश्म-ए-तर कहीं गुम हो गई
ऐ मिरी मिट्टी तवज्जोह चाहिए

डूबते सूरज के ये अल्फ़ाज़ थे
घुप अँधेरे की तवज्जोह चाहिए

बे-ख़याली तू कहाँ है आज-कल
तुझ को भी थोड़ी तवज्जोह चाहिए

कर रहे हैं आप दीवाना जिसे
उस को पहले ही तवज्जोह चाहिए