उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mare dosh par teri lash re o maashre

मरे दोष पर तिरी लाश रे ओ मुआ'शरे

مرے دوش پر تری لاش رے او معاشرے

शायर: Ikram Basra7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मरे दोष पर तिरी लाश रे ओ मुआ'शरे
तेरा मर्ग फ़िक्र-ए-मआ'श रे ओ मुआ'शरे

मैं जन्म जन्म का फ़क़ीर हूँ तो अमीर हूँ
मुझे रास मेरा क़िमाश रे ओ मुआ'शरे

कई उलझनों का जवाज़ हूँ कोई राज़ हूँ
मुझे मुझ पे रहने दे फ़ाश रे ओ मुआ'शरे

कई आसमानों से दूर हूँ मैं ग़ुरूर हूँ
मुझे कब है तेरी तलाश रे ओ मुआ'शरे

कोई बर्फ़-ज़ाद वजूद हूँ मैं जुमूद हूँ
मुझे धूप से न तराश रे ओ मुआ'शरे

मिरा ज़ख़्म ज़ख़्म दिखा दिया मुझे क्या दिया
फ़क़त आँसुओं का फ़राश रे ओ मुआ'शरे

ऐ ख़ुदा-ए-दिल ऐ ख़ुदा-ए-दिल ऐ ख़ुदा-ए-दिल
ओ मुआ'शरे ओ मुआ'शरे ओ मुआ'शरे