उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rona zar-o-qatar chhoD diya

रोना ज़ार-ओ-क़तार छोड़ दिया

رونا زار و قطار چھوڑ دیا

शायर: Om Krishn Rahat8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रोना ज़ार-ओ-क़तार छोड़ दिया
हम ने ये कारोबार छोड़ दिया

जिस पे नक़्श-ए-क़दम थे मजनूँ के
हम ने वो ख़ार-ज़ार छोड़ दिया

हम ने तारे तो गिन लिए लेकिन
आँसुओं का शुमार छोड़ दिया

साथ उम्मीद ही का मैं ने तो
था बहुत ख़ुश-गवार छोड़ दिया

जो भरोसा था सोच पर मुझ को
वो भी परवरदिगार छोड़ दिया

हम ने तो आसरा ख़ुदा का भी
जो कि था पाएदार छोड़ दिया

बे-वफ़ा जब लगी मुझे मैं ने
ज़िंदगी ही से प्यार छोड़ दिया

मैं ने तो शग़्ल-ए-शायरी 'राहत'
जब हुआ दिल पे बार छोड़ दिया