उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raushni ban kar bikharne ke liye

रौशनी बन कर बिखरने के लिए

روشنی بن کر بکھرنے کے لیے

शायर: SabeenSaif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रौशनी बन कर बिखरने के लिए
ज़िंदगी है 'इश्क़ करने के लिए

उँगलियों को हम क़लम करते रहे
चाहतों में रंग भरने के लिए

तोड़ डाला है ख़ुद अपने आप को
एक घर ता'मीर करने के लिए

आइने में रू-ब-रू था अजनबी
आज जब सोचा सँवरने के लिए

मैं वज़ीफ़ा पढ़ रही हूँ रात-दिन
आप के दिल में उतरने के लिए

जानती हूँ इक बहाना चाहिए
आप को मुझ से मुकरने के लिए