उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rang KHush-bu mein agar hal ho jae

रंग ख़ुश-बू में अगर हल हो जाए

رنگ خوش بو میں اگر حل ہو جائے

शायर: Parveen Shakir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंग ख़ुश-बू में अगर हल हो जाए
वस्ल का ख़्वाब मुकम्मल हो जाए

चाँद का चूमा हुआ सुर्ख़ गुलाब
तीतरी देखे तो पागल हो जाए

मैं अँधेरों को उजालूँ ऐसे
तीरगी आँख का काजल हो जाए

दोश पर बारिशें ले के घूमें
मैं हवा और वो बादल हो जाए

नर्म सब्ज़े पे ज़रा झुक के चले
शबनमी रात का आँचल हो जाए

उम्र भर थामे रहे ख़ुश-बू को
फूल का हाथ मगर शल हो जाए

चिड़िया पत्तों में सिमट कर सोए
पेड़ यूँ फैले कि जंगल हो जाए