उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rang hawa mein phail raha hai

रंग हवा में फैल रहा है

رنگ ہوا میں پھیل رہا ہے

शायर: Obaid Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंग हवा में फैल रहा है
देखो कैसा फूल खिला है

मेरे उस के बीच बदन है
और बदन में दिल दरिया है

किस को बताऊँ कैसे बताऊँ
सन्नाटे में शोर छुपा है

इस बस्ती के बाद है सहरा
उस के बाद न जाने क्या है

घर से बाहर निकलो ज़रा
देखो कितनी तेज़ हवा है