उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rang-e-duniya itna gahra ho gaya

रंग-ए-दुनिया इतना गहरा हो गया

رنگ دنیا اتنا گہرا ہو گیا

शायर: Madan Mohan Danish4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंग-ए-दुनिया इतना गहरा हो गया
आदमी का रंग फीका हो गया

रात क्या होती है हम से पोछिए
आप तो सोए सवेरा हो गया

आज ख़ुद को बेचने निकले थे हम
आज ही बाज़ार मंदा हो गया

ग़म अंधेरे का नहीं 'दानिश' मगर
वक़्त से पहले अंधेरा हो गया