उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai intizar muqaddar to intizar karo

है इंतिज़ार मुक़द्दर तो इंतिज़ार करो

ہے انتظار مقدر تو انتظار کرو

शायर: Madan Mohan Danish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है इंतिज़ार मुक़द्दर तो इंतिज़ार करो
पर अपने दिल की फ़ज़ा को भी ख़ुश-गवार करो

तुम्हारे पीछे लगी हैं उदासियाँ कब से
किसी पड़ाव पे रुक कर इन्हें शिकार करो

हमारे ख़्वाबों का दर खटखटाती रहती हैं
तुम अपनी यादों को समझाओ होशियार करो

भली लगेगी यही ज़िंदगी अगर उस में
ख़याल-ओ-ख़्वाब की दुनिया को भी शुमार करो

भरोसा बा'द में कर लेना सारी दुनिया पर
तुम अपने आप पे तो पहले ए'तिबार करो