उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aur kya aaKHir tujhe ai zindagani chahiye

और क्या आख़िर तुझे ऐ ज़िंदगानी चाहिए

اور کیا آخر تجھے اے زندگانی چاہیئے

शायर: Madan Mohan Danish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

और क्या आख़िर तुझे ऐ ज़िंदगानी चाहिए
आरज़ू कल आग की थी आज पानी चाहिए

ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई
रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए

इस को हँसने के लिए तो उस को रोने के लिए
वक़्त की झोली से सब को इक कहानी चाहिए

क्यूँ ज़रूरी है किसी के पीछे पीछे हम चलें
जब सफ़र अपना है तो अपनी रवानी चाहिए

कौन पहचानेगा 'दानिश' अब तुझे किरदार से
बे-मुरव्वत वक़्त को ताज़ा निशानी चाहिए