उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raaz ko apne dil mein rakho

राज़ को अपने दिल में रखो

راز کو اپنے دل میں رکھو

शायर: Badr Muneer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राज़ को अपने दिल में रखो
दुनिया को मुश्किल में रखो

सोचें हों परवाज़ में लेकिन
जड़ों को आब-ओ-गिल में रखो

हुस्न अगर है बे-पायाँ तो
इस को आँख के तिल में रखो

उस की याद के उजियारों को
अश्कों की झिलमिल में रखो

उस महताब-सिफ़त सूरत को
सपनों की महफ़िल में रखो

माज़ी को छोड़ो माज़ी में
हाल को मुस्तक़बिल में रखो

अच्छे यार और उन की यादें
जीवन के हासिल में रखो