उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raat achchha laga

रात अच्छा लगा

رات اچھا لگا

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रात अच्छा लगा
चाँद तुम सा लगा

आ गया जिस पे दिल
कौन कैसा लगा

हीर राँझा लगी
हीर राँझा लगा

जिस किसी से मिले
कम ज़ियादा लगा

ख़ुद को पहचानते
इक ज़माना लगा

अपनी अपनी नज़र
कौन कैसा लगा

कुछ पकड़ में नहीं
सब हुआ सा लगा

खेल खेला कोई
घर किसी का लगा

बस-कि रिसता रहे
ज़ख़्म ऐसा लगा

कल की छोड़ो मियाँ
आज कैसा लगा

तुम मिरे हो गए
वक़्त कितना लगा

जब कि तैराक तुम
पार मैं जा लगा

शख़्स 'आसी' फ़ुज़ूल
शाइ'र अच्छा लगा