उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raat aankhon mein KHwab aae the

रात आँखों में ख़्वाब आए थे

رات آنکھوں میں خواب آئے تھے

शायर: Yasmin Husaini Zaidi Nikhat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रात आँखों में ख़्वाब आए थे
मुस्कुराते जनाब आए थे

जिस में मर्क़ूम था वफ़ा का सबक़
फिर वो ले कर किताब आए थे

उन के होंटों ने जब ग़ज़ल छेड़ी
मेरे रुख़ पर गुलाब आए थे

फूल खिलने लगे थे सहरा में
सामने फिर सराब आए थे

मेरे हिस्से में हर ख़ुशी आई
ग़म भी कुछ बे-हिसाब आए थे

मेरे अरमान बह गए सारे
अब्र बन कर अज़ाब आए थे

रास्ते में बिखर गई 'निकहत'
बस वो सूखे गुलाब आए थे