उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon aankhon mein baat hone lagi

आँखों आँखों में बात होने लगी

آنکھوں آنکھوں میں بات ہونے لگی

शायर: Yasmin Husaini Zaidi Nikhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों आँखों में बात होने लगी
ख़ाली नींदों से रात होने लगी

उस की नज़रों में नश्शा था ऐसा
बरतरफ़ काएनात होने लगी

हर तरफ़ ज़ेहन-ओ-दिल के गोशे में
हाँ और न की बिसात होने लगी

जब कभी मिल गए वो क़िस्मत से
फिर ज़माने की बात होने गली

और बिछड़े तो कुछ तलब ऐसी
रेज़ा रेज़ा ये ज़ात होने लगी

न कभी हाल-ए-दिल कहा अब तो
ज़िंदगानी की रात होने लगी