उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi to baat hogi tumhaari nigah mein

कोई तो बात होगी तुम्हारी निगाह में

کوئی تو بات ہوگی تمہاری نگاہ میں

शायर: Yasmin Husaini Zaidi Nikhat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई तो बात होगी तुम्हारी निगाह में
दिल जो न रह सका था हमारी पनाह में

तुम से तो यूँ हुआ नहीं सरज़द कोई क़ुसूर
होगी कोई कमी ही हमारी निबाह में

हम क्यूँ करें तुम्हारी वफ़ा से कोई गिला
जब ख़ुद ही खो गए थे ज़माने की चाह में

तुम ने दिया था साथ मगर हम न चल सके
हम को नजात कब मिली काँटों से राह में

दरिया से प्यास बुझ न सकेगी ये सोच कर
लहरा के चल पड़े थे समुंदर की चाह में