उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rahbar so gae ham-safar so gae

राहबर सो गए हम-सफ़र सो गए

راہبر سو گئے ہم سفر سو گئے

शायर: Ejaz Rahmani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राहबर सो गए हम-सफ़र सो गए
कौन जागेगा हम भी अगर सो गए

गेसू-ए-वक़्त अब कौन सुलझाएगा
बे-ख़बर जाग उठे बा-ख़बर सो गए

इस हक़ीक़त से इंकार मुमकिन नहीं
सो गई क़ौम जब दीदा-वर सो गए

मिट गया दिल से क्या ख़ौफ़-ए-दार-ओ-रसन
लोग फूलों पे क्या सोच कर सो गए

अपनी बर्बादियाँ अपने हाथों हुईं
जागना था हमें हम मगर सो गए

बे-घरों को तकल्लुफ़ से क्या वास्ता
नींद आई सर-ए-रहगुज़र सो गए

वो गए घर की रा'नाइयाँ भी गईं
यूँ लगा जैसे दीवार-ओ-दर सो गए