उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rah-o-rasm-e-ibtidai dekh li

राह-ओ-रस्म-ए-इब्तिदाई देख ली

راہ و رسم ابتدائی دیکھ لی

शायर: Jagat Mohan Lal Ravan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राह-ओ-रस्म-ए-इब्तिदाई देख ली
इंतिहा-ए-बेवफ़ाई देख ली

सामने तारीफ़ ग़ीबत में गिला
आप के दिल की सफ़ाई देख ली

अब नहीं मिलना किसी से भी पसंद
सब की अच्छाई बुराई देख ली

नाम भी दामन पे सुर्ख़ी का नहीं
दीदा ओ दिल की कमाई देख ली

बे-ख़बर हैं वो मिरे हालात से
नाला-ए-दिल की रसाई देख ली

इश्क़ अपना है फ़क़त इतना 'रवाँ'
अच्छी सूरत आगे आई देख ली