उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rah mein chhoD kar nahin jata

राह में छोड़ कर नहीं जाता

راہ میں چھوڑ کر نہیں جاتا

शायर: Nadeem Bhabha7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राह में छोड़ कर नहीं जाता
साथ होता अगर नहीं जाता

उँगलियाँ फेर मेरे बालों में
ये मिरा दर्द-ए-सर नहीं जाता

यूँ लगा हूँ तिरे गले से मैं
जिस तरह कोई डर नहीं जाता

क्यों मिरा आस-पास घूमता है
क्यों ये नश्शा उतर नहीं जाता

यूँ पड़ा हूँ तुम्हारी यादों में
जिस तरह कोई मर नहीं जाता

कितना अच्छा था हम से पहले वहाँ
कोई रस्ता अगर नहीं जाता

इश्क़ इतना भी क्या ज़रूरी है
कोई बे-इश्क़ मर नहीं जाता