उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bas yahi kuchh hai martaba mere pas

बस यही कुछ है मर्तबा मिरे पास

بس یہی کچھ ہے مرتبہ مرے پاس

शायर: Nadeem Bhabha8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस यही कुछ है मर्तबा मिरे पास
एक तू है और इक दु'आ मिरे पास

तुझे कुछ वक़्त चाहिए मिरी जान
वक़्त ही तो नहीं बचा मिरे पास

रौशनी हिफ़्ज़ हो चुकी है मुझे
रख गया था कोई दिया मिरे पास

ये तिरी गुफ़्तुगू का लम्हा है
इस घड़ी है मिरा ख़ुदा मिरे पास

टहनियाँ झुक रही थीं तेरे लिए
और फल टूट के गिरा मिरे पास

एक रूमाल आँसुओं से भरा
और इक ख़त जला हुआ मिरे पास

तेरा नेमुल-बदल नहीं कोई
तू फ़क़त एक ही तो था मिरे पास

अब मैं झगड़ा करूँ तो किस से करूँ
अब तो तू भी नहीं रहा मिरे पास