उर्दू शायरी · ग़ज़ल

abd hone ka tajraba kiya hai

'अब्द होने का तज्रबा किया है

عبد ہونے کا تجربہ کیا ہے

शायर: Nadeem Bhabha7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अब्द होने का तज्रबा किया है
उस ने सोने का तज्रबा किया है

तुम इन्हें बारिशें समझते हो
हम ने रोने का तज्रबा किया है

ये परिंदा न डूबता इस ने
पर भिगोने का तज्रबा किया है

उस ने नाख़ुन बढ़ाए और हम ने
ज़ख़्म होने का तज्रबा किया है

एक पत्थर उठा के चादर में
संग ढोने का तज्रबा किया है

हम से खेला गया है सच-मुच में
या खिलौने का तज्रबा किया है

उस की आँखों में हम नहीं डूबे
यूँही खोने का तज्रबा किया है