उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rah-e-hayat mein dil-e-viran duhai de

राह-ए-हयात में दिल-ए-वीराँ दुहाई दे

راہ حیات میں دل ویراں دہائی دے

शायर: Saba Naqvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राह-ए-हयात में दिल-ए-वीराँ दुहाई दे
दुश्मन को भी ख़ुदा न ग़म-ए-आश्नाई दे

मैं साहिब-ए-क़लम हूँ मुझे ऐ शुऊर-ए-फ़न
आए न जो गिरफ़्त में ऐसी कलाई दे

दुनिया फ़रेब-ए-रिश्ता-ए-बाहम न दे मुझे
जो भाई-चारगी का हो पैकर वो भाई दे

मैं अपना हाथ अपने लहू में डुबो न लूँ
जब तक वो मेरे हाथ में दस्त-ए-हिनाई दे

ख़ंजर है जिस के हाथ में पत्थर है जिस का दिल
क्या उस के सामने कोई अपनी सफ़ाई दे

जिस पर मिरे लहू ने सजाया था नक़्श-ए-दिल
ऐ काश फिर मुझे वो हथेली दिखाई दे

इस ताज़ा कर्बला में भी यारब दुआ ये है
ईसार को नशेब वफ़ा को तराई दे

दूरी क़रीन-ए-मस्लहत-ए-वक़्त है अगर
क़ुर्बत के नाम पर मुझे दाग़-ए-जुदाई दे

सेहन-ए-चमन में गोश-बर-आवाज़ है 'सबा'
शायद दिल-ए-शमीम की धड़कन सुनाई दे