उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-nam saaton ka safar KHatm ho chala

बे-नाम साअ'तों का सफ़र ख़त्म हो चला

بے نام ساعتوں کا سفر ختم ہو چلا

शायर: Saba Naqvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-नाम साअ'तों का सफ़र ख़त्म हो चला
लो इम्तिहान-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र ख़त्म हो चला

वाँ तीरगी-ए-महफ़िल-ए-याराँ न मिट सकी
याँ रोग़न-ए-चराग़-ए-हुनर ख़त्म हो चला

एहसान है मशिय्यत-ए-परवरदिगार का
हंगामा-ए-हयात-ए-बशर ख़त्म हो चला

मय-ख़ाना-ए-हयात से रिंदो निकल चलो
पैमाना-ए-दुआ का असर ख़त्म हो चला

ऐ जान-ए-इंतिज़ार नया ज़ख़्म दे मुझे
लुत्फ़-ए-बहार-ए-दीदा-ए-तर ख़त्म हो चला

दिखला के आफ़्ताब-ए-दरख़्शाँ की इक झलक
अफ़्साना-ए-नुमूद-ए-सहर ख़त्म हो चला

उस ने इक और दाग़-ए-जिगर दे दिया 'सबा'
जब ए'तिबार-ए-सोज़-ए-जिगर ख़त्म हो चला