उर्दू शायरी · ग़ज़ल

afkar ke sanche mein Dhali taza ghazal hai

अफ़्कार के साँचे में ढली ताज़ा ग़ज़ल है

افکار کے سانچے میں ڈھلی تازہ غزل ہے

शायर: Saba Naqvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अफ़्कार के साँचे में ढली ताज़ा ग़ज़ल है
या वक़्त के पेचीदा सवालात का हल है

ये संग की बुनियाद पे ता'मीर न होगा
ये मेरे तख़य्युल का हसीं शीश-महल है

मैं अपनी मोहब्बत का बदल ढूँड रहा हूँ
वो कौन है जो मेरी मोहब्बत का बदल है

ऐ तार-ए-नफ़स टूट भी जा देर न कर अब
एहसास की बालीं पे खड़ी कब से अजल है

जो अर्सा-ए-माज़ी है मुअर्रिख़ की नज़र में
शाइ'र की निगाहों में वो गुज़रा हुआ पल है

जो हिज्र के मौसम में खुले दाग़ की सूरत
वो फूल ब-अल्फ़ाज़-ए-दिगर आग का फल है

मैं दर्स-ए-तहम्मुल हूँ 'सबा' राह-ए-तलब में
दुनिया ये समझती है कि बाज़ू मिरा शल है