उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rabta mujhse mera joD diya karta tha

राब्ता मुझ से मिरा जोड़ दिया करता था

رابطہ مجھ سے مرا جوڑ دیا کرتا تھا

शायर: Nadeem Bhabha4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राब्ता मुझ से मिरा जोड़ दिया करता था
वो जो इक शख़्स मुझे छोड़ दिया करता था

मुझे दरिया, कभी सहरा के हवाले कर के
वो कहानी को नया मोड़ दिया करता था

इस से आगे तो मोहब्बत से गिला है मुझ को
तू तो बस हात मिरा छोड़ दिया करता था

बात पेड़ों की नहीं, ग़म है परिंदों का 'नदीम'
घोंसले जिन के कोई तोड़ दिया करता था