उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qarar hote hue be-qarar yani main

क़रार होते हुए बे-क़रार या'नी मैं

قرار ہوتے ہوئے بے قرار یعنی میں

शायर: Iftikhar Haidar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़रार होते हुए बे-क़रार या'नी मैं
तुम्हारे हिज्र का इक सोगवार या'नी मैं

वतन से दूर वतन का मुक़ीम या'नी तू
वतन में रह के ग़रीब-उद-दयार या'नी मैं

सरापा किब्र व सरापा ग़ुरूर या'नी तू
तिरे ग़ुरूर पे हर दम निसार या'नी मैं

वफ़ा-ओ-मेहर-ओ-मोहब्बत का नाम या'नी तू
वफ़ा-ओ-मेहर-ओ-मोहब्बत शिआ'र या'नी मैं

हर इक अमल से मिरे बे-नियाज़ या'नी तू
नियाज़-ओ-नज़्र दिल-ओ-जाँ-गुज़ार या'नी मैं

उम्मीद-ए-आमद-ए-सुब्ह-ए-बहार या'नी तू
और इस बहार का उमीद-वार या'नी मैं

सुख़न में ताज़ा ख़यालों की मौज या'नी तू
सुख़न को बाइ'स-ए-सद-इफ़्तिख़ार या'नी मैं