उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pyar ki dil mein jab umang nahin

प्यार की दिल में जब उमंग नहीं

پیار کی دل میں جب امنگ نہیں

शायर: Vikas Agrawal Bindal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

प्यार की दिल में जब उमंग नहीं
बे-सबब करते हम भी तंग नहीं

तुम इसे ज़ेहन में बिठा लेना
हम सुकूँ चाहते हैं जंग नहीं

सरहदों पर जो होगी होली तो
ख़ून होगा फिर उस में रंग नहीं

रात भर जाग सुब्ह सोते हो
'ऐश-ओ-आराम का ये ढंग नहीं

दोस्तों के हवाले मत करना
ज़िंदगी है कोई पतंग नहीं

दिल के अरमान मर गए शायद
उठती सीने में अब तरंग नहीं

अपनी मर्ज़ी से जी सके 'बिंदल'
कोई इतना भी अब मलंग नहीं