उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek ek lafz ko sajaane se

एक इक लफ़्ज़ को सजाने से

ایک اک لفظ کو سجانے سے

शायर: Vikas Agrawal Bindal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक इक लफ़्ज़ को सजाने से
सा'अत 'उम्दा बनें बनाने से

नित-नई इक रदीफ़ चुनते हैं
इस तरह बात हो ज़माने से

लोग बातों से ऊब जाते हैं
ख़ुश ही हो लें ग़ज़ल सुनाने से

दिल की बातें हों इस में पर 'बिंदल'
शे'र बनते हैं सर खपाने से