उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Dar tera kar gaya hai ghar mujh mein

डर तिरा कर गया है घर मुझ में

ڈر ترا کر گیا ہے گھر مجھ میں

शायर: Vikas Agrawal Bindal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

डर तिरा कर गया है घर मुझ में
साफ़ दिखता है अब असर मुझ में

ज़ेहन-ओ-दिल सब तुम्हारे बस में हैं
बस गए हो तुम इस क़दर मुझ में

'इश्क़ के रंग चढ़ के उतरें कब
ये रहेंगे अब 'उम्र भर मुझ में

दीद-बाज़ी की शब जब आएगी
तब उतर आएगा क़मर मुझ में

हर अँधेरे से लड़ने को ‘बिंदल’
बाक़ी है आस की सहर मुझ में