उर्दू शायरी · ग़ज़ल

itni majbur to nahin hai man

इतनी मजबूर तो नहीं है माँ

اتنی مجبور تو نہیں ہے ماں

शायर: Vikas Agrawal Bindal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इतनी मजबूर तो नहीं है माँ
ख़्वाबों से दूर तो नहीं है माँ

सोचना बैठ के ये तुम भी ज़रूर
माँ है मज़दूर तो नहीं है माँ

ध्यान इस बात का भी रखना तुम
थक के फिर चूर तो नहीं है माँ

सख़्ती बच्चों पे करती है लेकिन
क़ल्ब से क्रूर तो नहीं है माँ

घर बस उस को सँभालना होगा
इस पे मामूर तो नहीं है माँ