उर्दू शायरी · ग़ज़ल

puchh lete wo bas mizaj mera

पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा

پوچھ لیتے وہ بس مزاج مرا

शायर: Fahmi Badayuni5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा
कितना आसान था इलाज मिरा

चारा-गर की नज़र बताती है
हाल अच्छा नहीं है आज मिरा

मैं तो रहता हूँ दश्त में मसरूफ़
क़ैस करता है काम-काज मिरा

कोई कासा मदद को भेज अल्लाह
मेरे बस में नहीं है ताज मिरा

मैं मोहब्बत की बादशाहत हूँ
मुझ पे चलता नहीं है राज मिरा