उर्दू शायरी · ग़ज़ल

piye jata hun saqi ki nazar se

पिए जाता हूँ साक़ी की नज़र से

پئے جاتا ہوں ساقی کی نظر سے

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पिए जाता हूँ साक़ी की नज़र से
मुझे क्या गर्दिश-ए-शाम-ओ-सहर से

मुनासिब है ग़ुरूर-ए-हुस्न लेकिन
उतर जाएगा सौदा भी ये सर से

ये किन बीते दिनों की याद आई
ये कैसे अश्क टपके चश्म-ए-तर से

बहुत मश्शाक़ होगा रहज़नी में
किसे थी ये तवक़्क़ो राहबर से

सितम ढा कर हमारे दिल पे अक्सर
ज़माना ख़ुद गिरा अपनी नज़र से

तिरे जलवों की ताबानी का आलम
कोई देखे ज़रा मेरी नज़र में

किसी की मस्त आँखों के तसद्दुक़
यक़ीं उठने लगा है मौत पर से

तुम्हें चाहूँ तो किस बूते पे चाहूँ
तुम्हें देखूँ तो देखूँ किस नज़र से

क़दम रक़्साँ जहाँ आलम जुनूँ ने
कोई तूफ़ाँ उठे इस रहगुज़र से

बहुत बिगड़े हुए हैं उन के तेवर
नज़र आता है ये उन की नज़र से

भरी महफ़िल में इज़हार-ए-मोहब्बत
ये लग़्ज़िश और फिर मेरी नज़र से

उठाए मौत ही फिर उन को 'आसी'
गिरा देते हैं वो जिन को नज़र से