उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phirun DhunDta mai-kada tauba tauba mujhe aaj-kal itni fursat nahin hai

फिरूँ ढूँडता मै-कदा तौबा तौबा मुझे आज-कल इतनी फ़ुर्सत नहीं है

پھروں ڈھونڈتا میکدہ توبہ توبہ مجھے آج کل اتنی فرصت نہیں ہے

शायर: श्रेय पुष्ट नहीं4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिरूँ ढूँडता मै-कदा तौबा तौबा मुझे आज-कल इतनी फ़ुर्सत नहीं है
सलामत रहे तेरी आँखों की मस्ती मुझे मय-कशी की ज़रूरत नहीं है

ये तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ का क्या तज़्किरा है तुम्हारे सिवा कोई अपना नहीं है
अगर तुम कहो तो मैं ख़ुद को भुला दूँ तुम्हें भूल जाने की ताक़त नहीं है

हमेशा मिरे सामने से गुज़रना निगाहें चुरा कर मुझे देख लेना
मिरी जान तुम मुझ को इतना बता दो ये क्या चीज़ है गर मोहब्बत नहीं है

हज़ारों तमन्नाएँ होती हैं दिल में हमारी तो बस इक तमन्ना यही है
मुझे इक दफ़ा अपना कह के पुकारो बस इस के सिवा कोई हसरत नहीं है