उर्दू शायरी · ग़ज़ल

patthar ke KHuda wahan bhi pae

पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए

پتھر کے خدا وہاں بھی پائے

शायर: Kaifi Azmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए
हम चाँद से आज लौट आए

दीवारें तो हर तरफ़ खड़ी हैं
क्या हो गए मेहरबान साए

जंगल की हवाएँ आ रही हैं
काग़ज़ का ये शहर उड़ न जाए

लैला ने नया जनम लिया है
है क़ैस कोई जो दिल लगाए

है आज ज़मीं का ग़ुस्ल-ए-सेह्हत
जिस दिल में हो जितना ख़ून लाए

सहरा सहरा लहू के खे़मे
फिर प्यासे लब-ए-फ़ुरात आए