उर्दू शायरी · ग़ज़ल

palkon pe ashk-e-gham se charaghan kiye hue

पलकों पे अश्क-ए-ग़म से चराग़ाँ किए हुए

پلکوں پہ اشک غم سے چراغاں کیے ہوئے

शायर: Saadiq Dehlavi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पलकों पे अश्क-ए-ग़म से चराग़ाँ किए हुए
हम हैं तुम्हारी दीद का सामाँ किए हुए

बज़्म-ए-जहाँ को हैं वो दरख़्शाँ किए हुए
हर रंग-ओ-बू में ख़ुद को नुमायाँ किए हुए

हम क्या डरेंगे गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार से
हम हैं तवाफ़-ए-कूचा-ए-जानाँ किए हुए

इक दिन नसीब होगी मुझे मंज़िल-ए-हयात
ज़ौक़-ए-तलब है राह को आसाँ किए हुए

दुनिया पे अब निगाह जमे भी तो क्या जमे
हुस्न-ओ-जमाल-ए-दोस्त है हैराँ किए हुए

मंज़ूर क़ैद-ए-ग़म से रिहाई नहीं हमें
हम ख़ुद हैं अपने क़ल्ब को ज़िंदाँ किए हुए

उस ने भी अपने चेहरे से पर्दा उठा दिया
देखा हमें जो चाक गरेबाँ किए हुए

दुनिया की ज़ुल्मतों को मैं बख़्शूँगा रौशनी
दिल में हूँ शम’-ए-‘इश्क़ फ़रोज़ाँ किए हुए

दिल मुतमइन है आप की निस्बत के फ़ैज़ से
हालात-ए-ज़िंदगी हैं परेशाँ किए हुए

'सादिक़' हमारी ज़ात है आईना-ए-वफ़ा
हम हैं जहान-ए-'इश्क़ का सामाँ किए हुए