उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab tera husn-e-nazar yaad aaya

जब तिरा हुस्न-ए-नज़र याद आया

جب ترا حسن نظر یاد آیا

शायर: Saadiq Dehlavi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब तिरा हुस्न-ए-नज़र याद आया
अपना दिल अपना जिगर याद आया

ऐसा मदहोश किया साक़ी ने
दश्त याद आया न घर याद आया

तुम भुलाते तो हो दीवाने को
फिर भी दीवाना अगर याद आया

तेरे अल्ताफ़-ओ-करम के क़ुर्बां
तू मुझे शाम-ओ-सहर याद आया

सू-ए-मय-ख़ाना चला रिंद-ए-ख़राब
फिर कोई मस्त-ए-नज़र याद आया

जब मिला चाक-ए-गिरेबाँ कोई
तेरे जलवों का असर याद आया

देख कर शहर-ए-ख़मोशाँ अक्सर
अपनी हस्ती का सफ़र याद आया

हाल-ए-दिल आप ने पूछा तो सही
शुक्र है बंदा-ए-दर याद आया

देख कर हुस्न-ए-जहाँ ऐ 'सादिक़'
मुझ को वो आइना-गर याद आया