उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum agar arz-e-muddaa na karen

हम अगर 'अर्ज़-ए-मुद्द'आ न करें

ہم اگر عرض مدعا نہ کریں

शायर: Saadiq Dehlavi11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम अगर 'अर्ज़-ए-मुद्द'आ न करें
आप क्या कुछ हमें 'अता न करें

आप मालिक हैं अपनी मर्ज़ी के
आप वा'दा करें वफ़ा न करें

मैं हूँ दीवाना मेरी बातों को
आप भी ग़ौर से सुना न करें

मैं मरीज़-ए-ग़म-ए-मोहब्बत हूँ
मेरे हक़ में कोई दु'आ न करें

हर सितम की इक 'उम्र होती है
आप अब ज़ुल्म-ए-ना-रवा न करें

मुझ को पहना के 'इश्क़ की ज़ंजीर
ज़िंदगी भर मुझे रिहा न करें

मुजरिम-ए-‘इश्क़ मुझ को ठहरा कर
मुझ से दुनिया को आश्ना न करें

ज़ुल्मतें दूर हो नहीं सकतीं
आप अगर दिल को पुर-ज़िया न करें

आप को कौन देख सकता है
आप जब तक नज़र 'अता न करें

पीर-ए-मय-ख़ाना जाम दे ऐसा
हम कभी होश में रहा न करें

है तक़ाज़ा ये 'इश्क़ का 'सादिक़'
हम किसी बात का गिला न करें