उर्दू शायरी · ग़ज़ल

andhera chha na jae mah-paro jagte rahna

अंधेरा छा न जाए माह-पारो जागते रहना

اندھیرا چھا نہ جائے ماہ پارو جاگتے رہنا

शायर: Saadiq Dehlavi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अंधेरा छा न जाए माह-पारो जागते रहना
तक़ाज़ा वक़्त का है ऐ सहारो जागते रहना

मिरी पलकों पे अश्कों के सितारो जागते रहना
मिरे टूटे हुए दिल के सहारो जागते रहना

बड़ी मुद्दत में वस्ल-ए-दोस्त की ये रात आई है
मिरे हमराह तुम भी चाँद तारो जागते रहना

जिलौ में नूर ले कर वो नुमायाँ होने वाले हैं
मिरी चश्म-ए-तमन्ना के सहारो जागते रहना

हर इक दिल में मोहब्बत की अभी बुनियाद रखनी है
तबस्सुम-रेज़ होंटों के शरारो जागते रहना

यही तो कह रहे हैं इंक़िलाब-ए-वक़्त के तेवर
बहुत तूफ़ान आएँगे किनारो जागते रहना

हज़ारों क़ाफ़िले हैं जादा-पैमा राह-ए-उल्फ़त में
ज़रा मंज़िल के ताबिंदा इशारो जागते रहना

अभी दिल-सोख़्ता होने में थोड़ी देर बाक़ी है
अभी कुछ और ऐ ग़म के शरारो जागते रहना

ये दुनिया है यहाँ ख़्वाबीदा रहना इक क़यामत है
यही कहता है 'सादिक़' ग़म के मारो जागते रहना