उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pairahan-e-tilism-e-bahaaran ki KHair ho

पैराहन-ए-तिलिस्म-ए-बहाराँ की ख़ैर हो

پیراہن طلسم بہاراں کی خیر ہو

शायर: Sabir Aarwi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पैराहन-ए-तिलिस्म-ए-बहाराँ की ख़ैर हो
अहल-ए-जुनूँ के तार-ए-गरेबाँ की ख़ैर हो

गुलशन में आ के लौट गई है बहार-ए-नौ
सब कह रहे हैं दश्त-ओ-बयाबाँ की ख़ैर हो

सौदा-ए-सर यहाँ है वहाँ नाज़-ए-हुस्न है
इस सर की ख़ैर या दर-ए-जानाँ की ख़ैर हो

होने लगे हैं अहल-ए-नज़र अब जुनूँ-नवाज़
अहल-ए-ख़िरद तुम्हारे शबिस्ताँ की ख़ैर हो

उन की निगाह-ए-नाज़ उठी है इसी तरह
'साबिर' तुम्हारे सब्र के दामाँ की ख़ैर हो