उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle to zehn se KHalal nikle

पहले तो ज़ेहन से ख़लल निकले

پہلے تو ذہن سے خلل نکلے

शायर: Naeem Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले तो ज़ेहन से ख़लल निकले
फिर किसी गुफ़्तुगू का हल निकले

मुझ को तो अपने रस्ते जाना है
आप क्यूँ साथ साथ चल निकले

जितना तुम चाहो मुझ को रुस्वा करो
कुछ तो एहसान का बदल निकले

अपने लहजे को मैं ने जब बदला
उस के माथे के सारे बल निकले

राग ऐसा अलापा है उस ने
ख़ुद-ब-ख़ुद सारे दीप जल निकले

दूर से वो जो लग रहे थे गुलाब
पास से देखा तो कँवल निकले

बीज बोए थे जिस के ऐ 'नजमी'
पेड़ में बस उसी के फल निकले