उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle apnaya Khaar phulon ka

पहले अपनाया ख़ार फूलों का

پہلے اپنایا خار پھولوں کا

शायर: Aamir Ata8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले अपनाया ख़ार फूलों का
तब कहीं पाया प्यार फूलों का

मैं भी गुलशन समेट लाया हूँ
उस ने माँगा था हार फूलों का

याद आती है उस की मत छेड़ो
ज़िक्र यूँ बार बार फूलों का

तुझ से मिलने के ब'अद ये जाना
कौन है दस्तकार फूलों का

फैल जा बन के ख़ुश्बू गुलशन में
छीन ले इख़्तियार फूलों का

तेरे छूने से ही तो चलता है
आज कल रोज़गार फूलों का

दे के इज़हार-ए-इश्क़ करते हैं
इस से समझो वक़ार फूलों का

जब से आमिर-'अता' हुआ आशिक़
चढ़ गया है उधार फूलों का