उर्दू शायरी · ग़ज़ल

paDh raha hun nisab ho jaise

पढ़ रहा हूँ निसाब हो जैसे

پڑھ رہا ہوں نصاب ہو جیسے

शायर: Hafeez Shahid9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पढ़ रहा हूँ निसाब हो जैसे
उस का चेहरा किताब हो जैसे

यूँ बसर कर रहा हूँ दुनिया में
ज़िंदगानी अज़ाब हो जैसे

शाख़-ए-क़ामत पे वो हसीं चेहरा
एक ताज़ा गुलाब हो जैसे

यूँ वो रहता है मेरी आँखों में
मेरी आँखों का ख़्वाब हो जैसे

वो मिरे बख़्त के ख़ज़ीने में
गौहर-ए-ला-जवाब हो जैसे

उस की हस्ती किताब-ए-हस्ती का
इक हसीं इंतिसाब हो जैसे

ज़हर-आलाम दिल के साग़र में
इक पुरानी शराब हो जैसे

झूट अब बोलते हैं लोग ऐसे
ये भी कार-ए-सवाब हो जैसे

रेग-ए-दश्त-ए-ख़याल में 'शाहिद'
याद उस की सराब हो जैसे