उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pas the dur hue jate hain

पास थे दूर हुए जाते हैं

پاس تھے دور ہوئے جاتے ہیں

शायर: Raaz Muradabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पास थे दूर हुए जाते हैं
कितने मजबूर हुए जाते हैं

ख़ुद किया तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ हम से
ख़ुद ही रंजूर हुए जाते हैं

इश्क़ में तेरी क़सम तेरे बग़ैर
नाले दस्तूर हुए जाते हैं

हश्र तक अब कोई पर्दे में रहे
हम भी मंसूर हुए जाते हैं

तुझ से निस्बत जो है दीवानों को
कितने मग़रूर हुए जाते हैं