उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nichi nazar kushada jabin darmiyana qad

नीची नज़र कुशादा जबीं दरमियाना क़द

نیچی نظر کشادہ جبیں درمیانہ قد

शायर: Aamir Ata5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नीची नज़र कुशादा जबीं दरमियाना क़द
गेसू दराज़ शीरीं ज़बाँ हुस्न मुस्तनद

माना वफ़ा के बल पे खड़ा है तो ठीक है
गिर जाएगा पर इश्क़ की दीवार से न लद

तब देर हो चुकी थी बहुत कैसे रोकता
पल्टी थी जब वो रोते हुए चूम कर लहद

हाजत तो एक तीसरी सिगरेट की है मगर
उस का ये हुक्म है कि बस इक दिन में दो अदद

बेगाना कर दे इश्क़ ग़म-ए-रोज़गार से
बस एक दीद के लिए दिन-भर के काम रद्द