उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar nazar mein liye tera pyar phirte hain

नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं

نظر نظر میں لیے تیرا پیار پھرتے ہیں

शायर: Habib Jalib5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं
मिसाल-ए-मौज-ए-नसीम-ए-बहार फिरते हैं

तिरे दयार से ज़र्रों ने रौशनी पाई
तिरे दयार में हम सोगवार फिरते हैं

ये हादिसा भी अजब है कि तेरे दीवाने
लगाए दिल से ग़म-ए-रोज़गार फिरते हैं

लिए हुए हैं दो आलम का दर्द सीने में
तिरी गली में जो दीवाना-वार फिरते हैं

बहार आ के चली भी गई मगर 'जालिब'
अभी निगाह में वो लाला-ज़ार फिरते हैं